लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में फायर सेफ्टी पर बड़ा अभियान, मुख्यमंत्री योगी ने दिए सख्त निर्देश
नीरज द्विवेदी। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुई दर्दनाक अग्निकांड घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक कर पूरे प्रदेश में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हादसा केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा और फायर सेफ्टी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जनपदों में विशेष टीमें गठित कर व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया जाए। इस अभियान के तहत अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग होमों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सरकारी भवनों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। जहां भी कमियां मिलेंगी, उन्हें निर्धारित समय सीमा में दूर कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन पहले लोगों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करे और उन्हें नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करे। इसके बाद आवश्यक होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनहित में चलाए जाने वाले इस अभियान के दौरान किसी भी नागरिक को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक में भवनों के उपयोग को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस भवन या भूमि को जिस उद्देश्य के लिए स्वीकृति मिली है, उसका उपयोग उसी कार्य के लिए होना चाहिए। आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने और बेसमेंट के दुरुपयोग को समाप्त करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, नर्सिंग होम या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं होनी चाहिए। यदि किसी भवन का बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही किया जाए।
मुख्यमंत्री ने व्यावसायिक भवनों में विद्युत सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताते हुए विद्युत भार की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां निर्धारित क्षमता से अधिक बिजली का उपयोग या अन्य तकनीकी खामियां पाई जाएं, वहां तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए ताकि संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
बैठक के दौरान लखनऊ अग्निकांड में राहत और बचाव कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं की सफलता काफी हद तक उनके रिस्पॉन्स टाइम पर निर्भर करती है। इसलिए अग्निशमन विभाग, एम्बुलेंस सेवाओं और अन्य राहत एजेंसियों को अपनी प्रतिक्रिया क्षमता और अधिक मजबूत करनी होगी ताकि किसी भी संकट की स्थिति में कम से कम समय में सहायता पहुंचाई जा सके।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा स्वास्थ्य संस्थानों का प्राथमिकता के आधार पर फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। साथ ही अग्निशमन विभाग को आधुनिक उपकरणों, तकनीकी संसाधनों और आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्नि सुरक्षा के नियम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि लोगों की जान बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने सभी विभागों को सतर्कता, जवाबदेही और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए ताकि प्रदेश में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।



