नीरज द्विवेदी। लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार की व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत 30 जून तक राज्य में 1.95 लाख से अधिक पुरानी और अनुपयोगी गाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप किया गया है। इनमें 1.85 लाख निजी वाहन और 10 हजार से ज्यादा सरकारी वाहन शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। सभी वाहनों की स्क्रैपिंग अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर निर्धारित मानकों के अनुसार की गई।
प्रदेश में अब तक 101 रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) पंजीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 50 केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। स्क्रैपिंग की पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के V-Scrap Portal और VAHAN सिस्टम के जरिए ऑनलाइन संचालित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और वाहन मालिकों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिली है।
यूपी सरकार का कहना है कि यह अभियान पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दिल्ली में मिल रहा इंसेंटिव
वहीं, दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी के तहत पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी और स्क्रैपिंग इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया है। यह लाभ दोपहिया, तिपहिया, कार और ट्रक समेत विभिन्न श्रेणियों के वाहनों पर लागू है।




