शिक्षा में बदलाव की नई पहल: योगी सरकार का फोकस कक्षा में बेहतर पढ़ाई, हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य

नीरज द्विवेदी। लखनऊ, 30 जून: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने ‘टीएलपीएस रिपोर्ट-2025’ का विमोचन किया और ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस’ संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों से सीधे संवाद कर शिक्षा सुधार की रूपरेखा स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में वास्तविक परिवर्तन सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि कक्षा में शिक्षक द्वारा अपनाई गई प्रभावी शिक्षण पद्धति से आएगा। यदि प्रत्येक शिक्षक बच्चों की सीखने की क्षमता और जरूरत के अनुसार पढ़ाई कराएगा, तो शिक्षा की गुणवत्ता स्वतः बेहतर होगी।

उन्होंने 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि तीन वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा बाल वाटिका से बाहर न रहे और छह वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे। साथ ही कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 में विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति शिक्षा सुधार की पहली शर्त है। यदि कोई छात्र लगातार विद्यालय नहीं आ रहा है तो शिक्षक स्वयं उसके घर जाकर या अभिभावकों से संपर्क कर उसे दोबारा विद्यालय से जोड़ने का प्रयास करें।

बैठक में कैच-अप लर्निंग को नए सत्र की शुरुआत से लागू करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य उन विद्यार्थियों की सीखने की कमी को दूर करना है जो किसी कारणवश पढ़ाई में पीछे रह गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग देकर मुख्यधारा में लाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि निपुण उत्तर प्रदेश कार्यक्रम का विस्तार अब कक्षा 3 से 5 तक भी किया जा रहा है। शिक्षकों को नियमित रूप से सीखने के परिणामों की समीक्षा करने, प्रगति का मूल्यांकन करने और उसकी जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने लेखन कौशल को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शिक्षकों से प्रतिदिन स्वतंत्र पठन और लेखन गतिविधियां कराने का आग्रह किया, ताकि बच्चों में भाषा कौशल, रचनात्मकता और तार्किक सोच का विकास हो सके।

उन्होंने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के प्रभावी उपयोग, विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी तथा शिक्षक संकुल बैठकों को नवाचार और अनुभव साझा करने का मंच बनाने पर भी विशेष जोर दिया। साथ ही 15 जून को जारी विभागीय निर्देशों में शामिल दस प्रमुख शिक्षण बिंदुओं पर प्रत्येक बैठक में विस्तृत चर्चा करने को कहा।

कार्यक्रम में आयोजित पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने प्रभावी कक्षा शिक्षण, निपुण कार्यक्रम, शैक्षणिक नेतृत्व और सहायक पर्यवेक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वहीं राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में किए गए सफल नवाचारों और पठन अभियान के अनुभव प्रस्तुत किए।

इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विद्यालयों में प्रवेश बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, व्यवहारिक और परिणाम आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था नई ऊंचाइयों तक पहुंच सके।

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