राजधानी लखनऊ के गोमती नगर (विपुल खंड) स्थित सहारा शहर की जमीन पर नई विधानसभा कॉम्प्लेक्स, सचिवालय और सीएम आवास बनाने का रास्ता साफ। सहारा शहर की 245 एकड़ जमीन पर बनेगा नया हाईटेक विधानभवन।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि विधानभवन कॉम्प्लेक्स की डिजाइन और प्लानिंग के लिए कंसल्टेंट व आर्किटेक्ट के लिए टेंडर (RFP) जारी कर दिया है। एलडीए की ओर से जारी आरएफपी के अनुसार, इच्छुक कंपनियां 23 मई से 21 जून तक आवेदन कर सकेंगी। टेंडर जारी होने के बाद आर्किटेक्ट और कंसल्टेंट का चयन होने के बाद प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्य योजना (DPR) तैयार होगी, जिसके आधार पर परियोजना की लागत और निर्माण अवधि तय की जाएगी। LDA ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ 13 मार्च को MoU साइन किया था। चयनित कंसल्टेंसी कंपनी को 2 महीने में जमीन की विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट देनी होगी। एलडीए की ओर से जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के मुताबिक, देश-दुनिया की इच्छुक कंपनियां 23 मई से लेकर 21 जून तक इस प्रोजेक्ट के लिए अपने आवेदन जमा कर सकेंगी।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के मुताबिक कुल 245 एकड़ प्रस्तावित जमीन में से 170 एकड़ नगर निगम की और 75 एकड़ एलडीए के स्वामित्व की जमीन है। भवन के लिए ₹100 करोड़ के शुरुआती बजट का प्रावधान किया गया है। ये वही जमीन है जिसे नगर निगम ने 1994 में सहारा इंडिया को 30 साल की लीज पर दिया था, जिसे पिछले साल लीज की शर्तों के उल्लंघन और अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम व एलडीए ने जमीन वापस अपने कब्जे में ले ली थी।
लखनऊ में मौजूदा विधानसभा भवन करीब 98 साल पुराना हो चुका है। इस ऐतिहासिक इमारत का शिलान्यास 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन गवर्नर सर स्पेन्सर हारकोर्ट बटलर द्वारा किया गया था और यह 21 फरवरी 1928 को बनकर तैयार हुई थी। हजरतगंज में उत्तर प्रदेश विधान भवन के निर्माण में कुल 21 लाख रुपये की लागत आई थी।
भविष्य में परिसीमन के बाद विधायकों की बढ़ती संख्या, डिजिटल कामकाज और सुरक्षा मानकों को देखते हुए नया भवन बनाना जरूरी हो गया था। सरकार को नए परिसर के लिए कम से कम 200 एकड़ जमीन चाहिए थी। नई विधानसभा का परिसर गोमती नगर में सहारा शहर की 245 एकड़ जमीन लोकेशन, साइज और कनेक्टिविटी के लिहाज से बिल्कुल आदर्श स्थान साबित होगा।प्रस्तावित नए विधानसभा भवन में विधान परिषद, मुख्यमंत्री-मंत्री-विधायकों के चैंबर, विशाल पार्किंग, ग्रीन बेल्ट, सचिवालय और मुख्यमंत्री आवास तक को एक ही जगह लाने पर भी मंथन हो रहा है।



