नीरज द्विवेदी। 31 मई अपडेटेड 01:07 PM IST
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है. जिसमें किसी विभाग में कोई अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाती है. हालांकि सरकार की इस नीति के बावजूद तमाम अधिकारी भ्रष्टाचार फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. ताजा मामले में यूपी के व्यावसायिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सख्त कार्रवाई करते हुए व्यावसायिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है. दोनों पर पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का बड़ा आरोप है.
जानकारी के अनुसार प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा और प्रधान सहायक इमरान अहमद पर निलंबन की कार्रवाई की गई है. दोनों अधिकारियों पर स्थानांतरण सत्र के दौरान तबादलों के नाम पर कथित कमीशनखोरी, रिश्वत लेने और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं और इसमें उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई. व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने सख्ती दिखाते हुए दोनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी किए हैं. निलंबन अवधि में सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार देवीपाटन मंडल में अटैच किए गए हैं. वहीं निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू भी कराया.
विभागीय सूत्रों के मुताबिक आरोप है कि ट्रांसफर सीज़न में इन दोनों ने 10 प्रतिशत तक कमीशन और ट्रांसफर कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली है. सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा पर तबादलों को प्रभावित करने, स्थानांतरण प्रक्रिया में अनियमितता, कमीशनखोरी और पद के दुरुपयोग, कर्मचारियों और अधिकारियों से धन की मांग के आरोप भी लगे हैं. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में यह भी दावा है कि स्थानांतरण कराने के बदले कथित तौर पर निर्धारित प्रतिशत के हिसाब से रकम वसूली जाती थी.
प्रधान सहायक इमरान अहमद के बारे में बताया जाता है कि पहले वह स्वयं से एवं कुछ लोगों के साथ मिलकर दूसरे नामों से विभाग में शिकायत करता था और बाद में उसी शिकायत का निराकरण या कार्रवाई रुकवाने के नाम पर संबंधित कर्मचारियो से मोटी रकम ऐंठता था. इमरान पर भ्रष्टाचार के अलावा, गिरोह बंद कार्य, कर्मचारियों के उत्पीड़न और धार्मिक भेदभाव का भी गंभीर आरोप लगा है. इमरान को प्रशिक्षण निदेशक अभिषेक सिंह ने निलंबित भी कर दिया है.
सरकार ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे और भी कड़ी कार्रवाई तय की जा सकती है. इस कार्रवाई के बाद विभाग के कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी. माना जा रहा है कि राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्यवाही सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.


