लखनऊ। Neeraj Dwivedi Updated, 08 July 2026
वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए कई नई योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया। इसके साथ ही विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता, शिक्षकों के लिए बीमा सुरक्षा और स्वच्छ विद्यालयों को सम्मानित करने जैसी कई अहम घोषणाएं भी की गईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। यदि शिक्षक सुरक्षित, स्वस्थ और निश्चिंत होंगे तो वे पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने शिक्षकों के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
नई मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षक एवं उनके आश्रितों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इससे इलाज के समय आर्थिक परेशानी कम होगी और शिक्षकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से प्रदेश के 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में प्रति छात्र 1200 रुपये की राशि भी भेजी। यह सहायता राशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी जैसी आवश्यक शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए प्रदान की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक स्थिति किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने।
शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया। इसके तहत लगभग 10 लाख शिक्षक और संविदा कर्मचारी जीवन बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, स्थायी विकलांगता कवर और हवाई दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
समारोह में शिक्षा के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यालयों को भी सम्मानित किया गया। भारत सरकार की स्वच्छ एवं हरित विद्यालय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने वाले उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और हरित विद्यालय बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रेरणादायक वातावरण तैयार करते हैं।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लंबे समय से अपेक्षित थी और अब इसे लागू कर सरकार ने उनकी एक महत्वपूर्ण मांग पूरी की है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे शिक्षक बिना किसी स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक चिंता के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षा सुधार के सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2017 में जहां विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की दर लगभग 15 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गई है। इसके अलावा सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 12 तक उच्चीकृत किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ जोड़ते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिससे शिक्षक सम्मानपूर्वक कार्य कर सकें और प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध हों। सरकार का लक्ष्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाना है।



