भारत में लॉन्च हुई सप्ताह में एक बार लगने वाली इंसुलिन ‘Awiqli’, डायबिटीज इलाज में नया विकल्प

नीरज द्विवेदी। लखनऊ, 09 जुलाई 2026,अपडेटेड 2:12 PM IST

भारत में डायबिटीज प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैश्विक हेल्थकेयर कंपनी Novo Nordisk ने भारत में सप्ताह में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन Awiqli (Insulin Icodec) लॉन्च की है। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन थेरेपी है, जिसे वयस्क टाइप-1 और टाइप-2 मधुमेह मरीजों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

 

क्या है Awiqli?

 

Awiqli, इंसुलिन इकोडेक पर आधारित एक लॉन्ग-एक्टिंग बेसल इंसुलिन है। इसे रोजाना इंजेक्शन की जगह सप्ताह में केवल एक बार लगाया जाता है। इसका उद्देश्य उन मरीजों के लिए इलाज को अधिक सुविधाजनक बनाना है जिन्हें रोजाना इंसुलिन लेने में कठिनाई होती है या इंजेक्शन का डर रहता है।

 

365 इंजेक्शन से 52 तक

 

सामान्य तौर पर बेसल इंसुलिन लेने वाले मरीजों को रोजाना इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है। नई थेरेपी के साथ यह संख्या घटकर साल में लगभग 52 इंजेक्शन रह सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर डायबिटीज मरीज को अब केवल 52 इंजेक्शन ही लगेंगे। यह सुविधा केवल उन मरीजों के लिए है जिनके लिए डॉक्टर साप्ताहिक बेसल इंसुलिन उपयुक्त मानते हैं।

 

पहले 365 इंजेक्शन/वर्ष

अब (साप्ताहिक बेसल इंसुलिन) 52 इंजेक्शन/वर्ष

 

किसे मिलेगी यह थेरेपी?

 

यह दवा 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्क मरीजों के लिए उपलब्ध है जो:

 

टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं और बेसल इंसुलिन की आवश्यकता रखते हैं।

 

टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं और डॉक्टर ने इंसुलिन थेरेपी शुरू करने की सलाह दी है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि दवा का उपयोग केवल डॉक्टर की निगरानी और सलाह पर ही किया जाना चाहिए।

 

क्लिनिकल ट्रायल में क्या मिला?

 

कंपनी के अनुसार, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल्स में Awiqli ने ब्लड शुगर नियंत्रण के मामले में रोजाना दिए जाने वाले बेसल इंसुलिन के समान प्रभाव दिखाया है। अध्ययन में मरीजों ने कम इंजेक्शन के कारण बेहतर सुविधा और उपचार पालन की भी जानकारी दी।

 

कीमत कितनी है?

 

पैक साइज 700 यूनिट

 

कीमत ₹2,611

 

प्रति यूनिट लागत ₹3.73

 

कंपनी का कहना है कि इसकी प्रति यूनिट लागत कई मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन विकल्पों की तुलना में लगभग 30–40% तक प्रतिस्पर्धी है।

 

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंजेक्शन का डर और रोजाना दवा लेने की परेशानी कई मरीजों में इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में 7 से 9 साल तक की देरी का कारण बनती है।

 

क्या भारत पहला देश बन गया?

 

“भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया”

सही तथ्य यह है कि Awiqli (Insulin Icodec) दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन है, लेकिन इसे अलग-अलग देशों में नियामक मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जहां यह थेरेपी अब व्यावसायिक रूप से लॉन्च की गई है।

 

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

 

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स का मानना है कि कम इंजेक्शन वाली थेरेपी से इलाज का पालन (adherence) बेहतर हो सकता है। हालांकि, हर मरीज के लिए यह विकल्प उपयुक्त नहीं होगा। डोज निर्धारण, ब्लड शुगर मॉनिटरिंग और अन्य दवाओं के साथ समन्वय डॉक्टर द्वारा तय किया जाएगा।

 

निष्कर्ष

 

Awiqli का भारत में लॉन्च डायबिटीज उपचार में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे उन मरीजों को राहत मिल सकती है जिन्हें रोजाना इंसुलिन लेने में कठिनाई होती है। फिर भी, यह रोजाना इंसुलिन का सार्वभौमिक विकल्प नहीं है और इसका उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

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