Neeraj Dwivedi Updated, 31 July 2026
लखनऊ, 31 जुलाई। विश्व फेफड़ों का कैंसर दिवस (1 अगस्त) के अवसर पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने कहा, “जागरूकता का दीप जलाएँ, फेफड़ों के कैंसर को हराएँ। धुआँ नहीं, उम्मीद जगाएँ और समय पर जांच कराकर अपनी सांसों की सुरक्षा करें।”
प्रो. वेद प्रकाश ने बताया कि फेफड़ों का कैंसर दुनिया में दूसरा सबसे अधिक होने वाला कैंसर है, लेकिन कैंसर से होने वाली मौतों का यह सबसे बड़ा कारण भी है। वर्ष 2020 में दुनिया भर में इसके लगभग 22 लाख नए मामले सामने आए, जबकि 18 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। भारत में हर साल करीब 67 हजार नए मरीज सामने आते हैं और पुरुषों में कैंसर से होने वाली मौतों का यह प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा कि धूम्रपान करीब 85 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा सेकेंडहैंड स्मोक, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, एस्बेस्टस, औद्योगिक रसायन, टीबी, COPD, पारिवारिक इतिहास और लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहना भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। वहीं करीब 10 से 15 प्रतिशत मरीज ऐसे भी होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया होता, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केवल धूम्रपान ही नहीं बल्कि अन्य पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार हैं।
प्रो. वेद प्रकाश के अनुसार, लगातार खांसी, खांसी में खून आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, आवाज बैठना, बिना कारण वजन घटना, भूख कम लगना, लगातार थकान, बार-बार संक्रमण, चेहरे या गर्दन में सूजन, हड्डियों में दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने पर मरीज के पांच वर्ष तक जीवित रहने की संभावना लगभग 59 प्रतिशत तक रहती है, जबकि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाने पर यह घटकर करीब 6 प्रतिशत रह जाती है। हाई-रिस्क लोगों में लो-डोज CT स्कैन के जरिए शुरुआती जांच करने से फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों में लगभग 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
KGMU के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में फेफड़ों के कैंसर की जांच के लिए चेस्ट एक्स-रे, CT स्कैन, PET-CT, MRI, ब्रोंकोस्कोपी, EBUS, थोराकोस्कोपी, स्पुटम साइटोलॉजी, नीडल बायोप्सी, सर्जिकल बायोप्सी, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और लिक्विड बायोप्सी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इलाज के लिए सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और पैलिएटिव केयर जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि धूम्रपान छोड़ना, दूसरों के धुएं से बचना, प्रदूषण से दूरी बनाना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और हाई-रिस्क व्यक्तियों की समय-समय पर स्क्रीनिंग कराना फेफड़ों के कैंसर से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच कराएं।
विश्व फेफड़ों का कैंसर दिवस पहली बार 2012 में फोरम ऑफ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज़ (FIRS) और इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लंग कैंसर (IASLC) की पहल पर मनाया गया था। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना, बीमारी की जल्द पहचान को बढ़ावा देना और आधुनिक उपचार तक मरीजों की पहुंच सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रो. वेद प्रकाश के साथ पद्मश्री प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. यू.एस. पाल, प्रो. शैलेंद्र यादव, डॉ. शिव राजन, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. ऋचा त्यागी, डॉ. यश जगधारी, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव, डॉ. संदीप, डॉ. अपर्णा सहित विभाग के कई वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।



