
राजधानी लखनऊ में सोमवार को केजीएमयू के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने प्रेसवार्ता का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने अस्थमा बीमारी को लेकर जानकारी दी.
विश्व अस्थमा दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है जो हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाता है ताकि दुनिया भर में अस्थमा के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। इस वर्ष 2026 का विश्व अस्थमा दिवस 5 मई (मंगलवार) को मनाया जा रहा है।
प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश ने बताया अस्थमा एक सांस की बीमारी है जो वायुमार्ग को प्रभावित करती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. इससे घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ होती है. अस्थमा एक आम बीमारी है, जिससे विश्व में अनुमानित 26.2 करोड़ (WHO 2024) लोग प्रभावित है. वैष्विक स्तर पर अस्थमा से प्रतिवर्ष लगभग 4.55 लाख लोगों की मृत्यु होती है (WHO 2024)। यह बीमारी मुख्य रूप से छोटे उम्र के बच्चों में पायी जाती है। भारत में अनुमानतः 2–5 % जनसंख्या अस्थमा से ग्रस्त है। वैश्विक अस्थमा मामलों के लगभग 13 % भारत में पाये जाते हैं जिससे स्वास्थ्य‑व्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है। अस्थमा लाइलाज बीमारी नही है, उचित उपचार व जीवन‑शैली में बदलाव से इसे पूरी तरह नियंत्रित कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है। अस्थमा का प्रसार हाल के वर्षों में लगातार बढ़ रहा है. यह बातें सोमवार को केजीएमयू के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने अस्थमा पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहीं.
“अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए anti-inflammatory inhalers की उपलब्धता — अभी भी एक अति आवश्यकता है।
“सही उपचार से अस्थमा बाधा नहीं—हर रोगी जी सकता है सामान्य जीवन ।”
“अस्थमा पर जीत का मंत्र: जागरूकता, नियमित उपचार और इनहेलर का सही उपयोग ।”
अस्थमा की समस्या:-
• अस्थमा विश्व और भारत दोनों के लिए एक सतत् स्वास्थ्य समस्या है।
• अस्थमा रोग बच्चों एवं किशोरों में सबसे सामान्य दीर्घकालिक रोग है, जिससे बार‑बार अस्पताल में भर्ती होना और विद्यालय में अनुपस्थितियाँ होना सम्मिलित हैं।
• महिलाओं में अस्थमा की व्यापकता पुरुषों से अधिक है।
• 2021 में अस्थमा प्रबंधन पर वैश्विक स्तर पर लगभग ₹ 68,300 करोड़ का खर्च आया था।
• अनुमानतः भारत में 3.4 करोड़ से अधिक लोग अस्थमा ग्रसित हैं।
• अस्थमा‑सम्बंधित वैश्विक मौतों का 46 % हिस्सा भारत में होता है, जो समुचित निदान एवं उपचार तक मरीजों की पहुंच ना होना दर्शाता है।
• खराब वायु गुणवत्ता भारत में अस्थमा की समस्या का एक प्रमुख कारक है।
• जागरूकता की कमी और अल्प‑निदान एक बड़ी चुनौती है एक अध्ययन के अनुसार केवल 50 प्रतिशत भारतीय अस्थमा रोगियों का सही निदान व उपचार हो पाता है।
• एलर्जी एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है और इसकी व्यापकता लगातार बढ़ रही है।
• विश्व एलर्जी संगठन के अनुसार, विश्व की 30-40% जनसंख्या किसी न किसी एलर्जी से प्रभावित है।
• एलर्जिक राइनाइटिस वयस्कों में 10-30 % तथा बच्चों में 40 % तक को प्रभावित करता है।
• खाद्य एलर्जी विश्व स्तर पर 6-8 % बच्चों और 2-4 % वयस्कों में पाई जाती है।
• संयुक्त राज्य अमेरिका में एलर्जी‑रोधी दवाओं पर वार्षिक खर्च 5 अमेरिकी अरब डॉलर (लगभग ₹ 4,000 करोड़) से अधिक है।
अस्थमा के प्रमुख लक्षणः
घरघराहट (छाती से सीटी की ध्वनि) ।
साँस फूलना या साँस लेने में कठिनाई ।
विशेषकर रात में या सुबह होने वाली खांसी ।
छाती में जकड़न, दर्द या घुटन‑सा महसूस होना ।
ट्रिगरः एलर्जेन, संक्रमण, वायु‑प्रदूषण, ठंडी हवा, शारीरिक व्यायाम, मानसिक तनाव आदि अस्थमा के ट्रिगर (बढाने वाले तत्व) का कार्य करते है।
ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) ने विश्व अस्थमा दिवस 2026 के लिए “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए anti-inflammatory inhalers इनहेलर की उपलब्धता – एक अति आवश्यकता” को थीम के रूप में चुना है। इस वर्ष के विश्व अस्थमा दिवस की थीम इस बात पर बल देती है कि अस्थमा से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति, जिसमें अधिकांश प्री-स्कूल बच्चे भी शामिल हैं, को इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (ICS) प्राप्त होने चाहिए। ये इनहेलर अस्थमा के दौरे के जोखिम को कम करते हैं और रोकी जा सकने वाली अस्थमा से होने वाली मौतों को कम करते हैं।
भारत में, आवश्यक दवाओं की सूची में ICS को शामिल किए जाने के बावजूद, जागरूकता की कमी, सामाजिक कलंक, जेब से अधिक खर्च और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी समस्याओं जैसे कारकों के कारण इनका उपयोग अभी भी अपर्याप्त है। अस्थमा से संबंधित बीमारी और मृत्यु दर को कम करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान करना अत्यंत आवश्यक है।
अस्थमा प्रबंधनः बेहतर परिणामों के लिए रणनीतियाँ :-
कंट्रोलर दवाएँः एयरवे सूजन कम करने हेतु नियमित रूप से इनहेलेड कॉर्टिको‑स्टेरॉयड्स का उपयोग किया जाता है।
रिलीवर दवाएँः तुरंत लक्षण से राहत पाने के लिए ब्रोंकोडाएलेटर्स का उपयोग किया जाता है।
ट्रिगर से बचावः व्यक्तिगत ट्रिगर पहचान कर न्यूनतम संपर्क करके अस्थमा को बढाने से रोका जा सकता है।
फेनोटाइप की पहचानः प्रत्येक रोगी भिन्न होता है। व्यक्तिगत उपचार योजना आवश्यक होती है।
नियमित फॉलो‑अपः चिकित्सकीय निगरानी व योजना में समय‑समय पर संशोधन से अस्थमा का समुचित इलाज किया जाता है।
रोगी शिक्षाः अस्थमा एवं प्रबंधन संबंधी जानकारी देकर रोगी को सशक्त बनाना।
उचित प्रबंधन से अस्थमा रोगी पूर्णतः सक्रिय एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
अस्थमा की रोकथाम:
• वायु प्रदूषण, ठंडी हवा, सुगंध आदि जैसे अस्थमा को ट्रिगर करने वाले कारकों के संपर्क से बचें।
• एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क से बचें।
• सिगरेट, मोमबत्ती, अगरबत्ती और पटाखों के धुएं से बचें।
• बीमार लोगों (सर्दी या फ्लू) से दूर रहें।
• आसपास के वातावरण को धूल रहित रखें।
• निमोनिया, डिप्थीरिया, टेटनस, दाद और काली खांसी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाएं।
• अस्थमा की दवाएं नियमित रूप से लें।
आगे की राहः अनुसंधान एवं रोकथाम:-
• किफायती इनहेलेशन दवाओं तक पहुँच सुलभ कराना।
• कम‑लागत, उच्च‑दक्षता वाले इनहेलर विकसित करना।
• विशेषकर वंचित क्षेत्रों में जन‑जागरूकता अभियान चलाना।
• डिजिटल स्वास्थ्य साधनों का उपयोग कर निगरानी एवं सहायता।
• वायु‑प्रदूषण में कमी हेतु पर्यावरणीय नीतियों का अनुपालन।
• गंभीर अस्थमा के लिए बायोलॉजिक चिकित्सा, आनुवंशिक जोखिम व्यक्तिगत एवं वैयक्तिकृत उपचार के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान उत्साहजनक परिणाम दे रहे हैं।
पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन द्वारा अस्थमा के उपचार सम्बन्धित प्रतिबद्धता:-
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग एलर्जी एवं अस्थमा की समग्र देख‑रेख हेतु समर्पित है। अत्याधुनिक सुविधाओं एवं विशेषज्ञ टीम के साथ, विभाग सटीक निदान के लिए परिष्कृत पल्मोनरी फंक्शन जांच तथा स्किन प्रिक टेस्ट सहित विभिन्न एलर्जी परीक्षण उपलब्ध कराता है। गंभीर अथवा व्यापक अस्थमा में बायोलॉजिक थेरेपी एवं इम्यूनोथेरेपी का विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है, जिससे प्रत्येक रोगी के लिए वैयक्तिकृत एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो।
इस प्रेस विज्ञप्ति में प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश, विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, प्रो0 आर0ए0एस0 कुशवाहा प्रोफेसर, रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग, के0जी0एम0यू0 लखनऊ प्रो0 राजेष कुमार प्रोफेसर, पीडियाट्रिक्स विभाग, के0जी0एम0यू0 लखनऊ डा0 सचिन कुमार, डा0 मो0 आरिफ, डॉ0 अनुराग, डॉ0 ऋचा, डॉ0 यश, डॉ0 दीपक, डॉ0 शुभ्रा, आदि लोग उपस्थित रहे।

