नीरज द्विवेदी। 21 मई 2026, अपडेटेड 6:50 PM (IST)
लखनऊ: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इसके तहत, राजधानी लखनऊ की मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं। साथ ही नगर निगम के नियमित कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को सौंप दी गई है। यह कार्रवाई एक निर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाए जाने के मामले में की गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस क़मर हसन रिजवी की खंडपीठ ने मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय प्रशासनिक अधिकार सीज करने का बड़ा आदेश दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ के मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को गुरुवार को हाजिर होने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से सत्र अदालत द्वारा ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किए जाने के पांच महीने बाद भी अब तक शपथ नहीं दिलाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं कि जब तक कोर्ट द्वारा निर्वाचित घोषित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, मेयर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज रहेंगे।
वहीं हाईकोर्ट के फैसले से पहले ही मेयर सुषमा खर्कवाल कमांड हॉस्पिटल में भर्ती हैं। बड़े मंगल के दिन लखनऊ में भंडारों में जाने की वजह से सुषमा खर्कवाल को गर्मी लग गई थी। इससे उनकी तबीयत खराब चल रही थी। जिससे आज सुबह मेयर चक्कर खाकर गिर गई। इसके बाद सुषमा खर्कवाल को भर्ती कराया गया है।
साल 2023 में लखनऊ के नगर निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदीप कुमार शुक्ला विजयी घोषित हुए थे, लेकिन हलफनामे में गड़बड़ी के चलते कोर्ट ने दिसंबर 2025 में उनका निर्वाचन रद्द कर सपा समर्थित ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित किया था। सुप्रीम कोर्ट से भाजपा प्रत्याशी की याचिका खारिज होने के बाद भी पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जा रही थी। कोर्ट ने कहा है कि अगर बुधवार तक शपथ नहीं दिलाई जाती तो मेयर और डीएम दोनों उपस्थित होकर इसका स्पष्टीकरण देंगे। मामले में सीनियर एडवोकेट गौरव मेहरोत्रा ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।




