
न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर केंद्रीय श्रम मंत्री से मिलेंगे – अनिल राजभर
लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम मंत्री अनिल राजभर 3 मई को केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया से ईपीएफ की न्यूनतम पेंशन बढ़ाए जाने के संबंध में बात करेंगे। यह जानकारी आज यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा प्रेस क्लब में आयोजित मई दिवस कार्यक्रम में देते हुए उन्होंने बताया कि यूनियन द्वारा इस संबंध में उन्हें पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर बातचीत के लिए समय मांगा था। यूनियन की मांग है कि पीएफ की न्यूनतम पेंशन 1000 से बढ़ाकर 5000 रुपए की जाए।
अनिल राजभर से यूनियन ने अनुरोध किया कि वह एक वृहद संवाद कार्यक्रम आयोजित करें जिसमें प्रदेश भर के पत्रकार प्रतिनिधि शामिल हो। जिसमें वह भी दो-तीन घंटे समय देंगे। यूनियन के प्रादेशिक अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में पत्रकारों को पेंशन, पत्रकार सुरक्षा कानून, पीजीआई में सभी श्रमजीवी पत्रकारों को चिकित्सा सुविधा, प्राथमिकता पर भूखंडों का आवंटन, आर्थिक सहायता के लिए स्थाई व्यवस्था तथा ट्रेन किराए में छूट की व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग की गई। विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कहा कि कलम के सामने चुनौतियां हैं लेकिन पत्रकारों को सच्चाई का पक्ष बहादुरी के साथ रखना चाहिए। समाज के वंचित, परेशान और पीड़ित लोगों की आवाज पत्रकार कलम के माध्यम से सरकार और शासन तक बेबाकी से पहुंचाएं। पत्रकारिता जुनून है एवं राजनीति का क्षेत्र भी जुनून है। हम लोग 24 घंटा क्षेत्र में व्यस्त रहते हैं। पत्रकार को सहज, सरल और कर्मठ होना चाहिए। अपने इन्हीं गुणों से वह सरकार और समाज के बीच ऊंचे मानदंड स्थापित करता है।
यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ी है। पहले सरकार के निर्णय की विसंगति की स्वस्थ आलोचना अखबारों में छपती थी। मुख्यमंत्री भी खबर बन जाते थे। जिला प्रशासन और शासन के कार्यों की अब स्वस्थ आलोचना भी पत्रकारों के लिए खतरे की घंटी है। पत्रकारों के विरुद्ध मुकदमे लिखे जा रहे हैं। खबरें रोकी जा रही हैं। यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
इस अवसर पर हिंद मजदूर महासभा के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर मिश्र ने कहा कि पत्रकारों के वेज बोर्ड बनना बंद हो गए हैं। कोरोना काल के बाद पत्रकारों की सुविधा भी छीन ली गई है। आज समय इस बात का आ गया है कि हम अपने हक के लिए एकजुट होकर लड़ाई लड़ें। श्रमिकों के लिए अब चार कोड की नई परिभाषा आ गई है लेकिन इससे पत्रकारों का हित नहीं होने वाला है। पहले 8 घंटे की ड्यूटी होती थी, अब 12 घंटे की ड्यूटी कर दी गई है।
इसी क्रम में यूनियन के मंडल अध्यक्ष शिवशरण सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों के संगठन तो बहुत बनते जा रहे हैं लेकिन उनके हित की कोई बात जमीनी स्तर पर नहीं कर रहा है। अब एकजुट होकर पत्रकारों की लड़ाई यूनियन लड़ेगी। यूनियन के प्रदेश महामंत्री देवराज सिंह ने कहा कि पत्रकारों के श्रम के साथ न्याय नहीं किया जा रहा है, सरकार को इसे गंभीरता से विचार करना चाहिए। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रजत मिश्रा ने कहा पत्रकारों की समस्याओं को सरकार प्राथमिकता से पूरी करें। इस अवसर पर अनिल त्रिपाठी, राजीव बाजपेई, सुमन गुप्ता, कला निधि मिश्रा, अनिल सैनी ,तमन्ना फरीदी, अजीत कुमार सिंह, मुकुल मिश्रा, महिमा तिवारी ,आदर्श प्रकाश सिंह, नासिर, नायला किदवई, रेनू निगम, गिरीश श्रीवास्तव, शैलेंद्र सिंह, आशीष सिंह, त्रिलोक नाथ मिश्रा, शिव विजय सिंह, नितिन श्रीवास्तव, आदित्य शुक्ला, नजम एहसान, अब्दुल वाहिद, जुबेर अहमद, संजय सिंह, राकेश शुक्ला, अमित यादव, राजेश शुक्ला, विजय मिश्रा, अमरेंद्र सिंह, हरिराम अरोड़ा ,सूर्य नारायण सिंह, रामचंद्र वर्मा, हुजैफा अबरार, सौरभ निगम एवं प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए पत्रकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रेमकांत तिवारी ने किया।

