उत्तराखंड की उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव! सरकारी विश्वविद्यालय बनाएंगे 5 साल का विजन प्लान, NAAC और NIRF रैंकिंग पर सरकार का फोकस

नीरज द्विवेदी। देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप अगले पांच वर्षों का विकास रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग हासिल करनी होगी।

बैठक में प्रदेश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ महाविद्यालयों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल पाठ्यक्रमों में बदलाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध क्षमता, डिजिटल संसाधन और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इसी उद्देश्य से सभी विश्वविद्यालयों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 11 सरकारी विश्वविद्यालयों को NAAC मान्यता और NIRF रैंकिंग में बेहतर स्थान हासिल करने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। इसके लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए जाएंगे। साथ ही सरकारी और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के लिए अगले 8 से 10 दिनों के भीतर राज्य स्तरीय रैंकिंग के मानक तैयार करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि संस्थानों के प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।

मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनकी प्रगति पर नजर रखने के लिए एक मजबूत ट्रेसिंग मैकेनिज्म विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में छात्रों की इंटर्नशिप, कौशल विकास, प्लेसमेंट और रोजगार से जुड़ी जानकारी भी शामिल की जाए, जिससे शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

उन्होंने विश्वविद्यालयों को उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्य संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाने की सलाह दी। उनका कहना था कि इससे छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के सहयोग से बहुआयामी शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर भी बल दिया गया।

बैठक में सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, अपर सचिव मनुज गोयल, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. दीवान एस. रावत, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. एन.के. जोशी, प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए फैसलों को उत्तराखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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