वैज्ञानिकों ने बनाई ‘स्मार्ट हर्बल पट्टी’, चोट लगने या बड़े ऑपरेशन के बाद होने वाले घाव और जिद्दी इन्फेक्शन के संक्रमण का जल्द करेगी उपचार

CSIR-NBRI लखनऊ के वैज्ञानिकों ने ‘थाइम’ (अजवाइन के तेल) से बनी एक खास ‘हर्बल नैनो-ड्रेसिंग’ विकसित की है, जो पुराने से पुराने घाव और एंटी-बायोटिक्स को बेअसर करने वाले ‘सुपरबग्स’ को मात्र 24 घंटे में खत्म कर सकती है।

चोट लगने या बड़े ऑपरेशन के बाद होने वाले घाव और जिद्दी इन्फेक्शन को ठीक करने में अब हफ्तों का इंतजार नहीं करना होगा। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘नैनो-ड्रेसिंग’ (हर्बल पट्टी) विकसित की है, जो न केवल घाव को जल्दी से हीलिंग करेगी, बल्कि एंटी-बायोटिक्स को बेअसर करने वाले ‘सुपरबग्स’ का भी सफाया कर देगी।

इस पट्टी की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल हुआ थाइम (अजवाइन का तेल) है, जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाता जाता है। संस्थान के निदेशक डॉ एके शासनी के मार्गदर्शन में हुए इस शोध में डॉ. आराधना मिश्रा और AMPRI भोपाल की डॉ. चेतना के साथ पीएचडी स्टूडेंट प्रिया वर्मा की भी अहम भूमिका रही। इस महत्वपूर्ण रिसर्च को दुनिया के प्रतिष्ठित जर्नल ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल मैक्रोमोलेक्यूल्स’ में स्थान मिला है। इसमें जिलेटिन-रिइंफोर्ड PCL नैनोफाइबर्स का उपयोग हुआ है।

CSIR-NBRI लखनऊ की वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आराधना मिश्रा ने बताया कि यह एक हर्बल नैनो मैटीरियल मेट है। इसे बायोडिग्रेडेबल नैनो फाइबर ‘इलेक्ट्रोस्पिनिंग’ तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें जिलेटिन-रिइंफोस्र्ड PCL नैनोफाइबर्स का उपयोग हुआ है।

यह पट्टी दिखने में बिल्कुल मानव शरीर की कोशिकाओं (ईसीएम) जैसी है, जिससे घाव भरने की प्राकृतिक प्रक्रिया तेज हो जाती है।

शोध के अनुसार, यह पट्टी MRSA (मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया) और ई-कोलाई जैसे खतरनाक कीटाणुओं को मात्र 12 से 24 घंटे के भीतर खत्म कर देती है।

घावों पर जमने वाली बैक्टीरिया की चिपचिपी परत (बायोफिल्म) को यह 95% तक रोक देती है। घाव के आसपास होने वाली जलन और ऑक्सीडेटिव स्टेस को कम करने में यह 90% से ज्यादा असरदार है।

अक्सर सामान्य पट्टिया घाव से चिपक जाती है, जिससे पट्टी बदलते समय दर्द होता है। लेकिन यह हाइब्रिड पड्ट्टी हाइड्रोफिलिक है। यह नमी सोखती है और घाव को ‘ब्रीदिंग स्पेस’ (सास लेने की जगह) देती है। इसका वॉटर काटेक्ट एगल 115 से घटकर 38 रह गया है, जो चिकित्सा विज्ञान में घाव भरने के लिए सबसे आदर्श स्थिति मानी जाती है।

 

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