Neeraj Dwivedi Updated, 27 July 2026
लखनऊ, 27 जुलाई: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और गुरुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए एक विस्तृत संदेश जारी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा, संस्कार और मूल्य प्रदान करने वाले मार्गदर्शक होते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के प्रति सदैव श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखें तथा उनके बताए आदर्शों को जीवन में उतारकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास की पावन स्मृति में मनाया जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन, महाभारत की रचना और अनेक पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को अमूल्य धरोहर प्रदान की। इसलिए यह दिन ज्ञान, तप, साधना और गुरु परंपरा के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल सनातन परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विविध आध्यात्मिक परंपराओं में समान रूप से पूजनीय है। बौद्ध परंपरा में इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। जैन परंपरा में यह दिवस भगवान महावीर के प्रथम शिष्य गौतम स्वामी के ज्ञान प्राप्ति प्रसंग से जुड़ा हुआ है। वहीं सिख परंपरा में गुरु-वाणी और गुरु ग्रंथ साहिब को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व सभी परंपराओं में गुरु, ज्ञान, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त कर मर्यादा पुरुषोत्तम बनने का मार्ग अपनाया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर आदर्श शिष्य का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन समाजों ने अपने गुरुजनों का सम्मान किया, वे ज्ञान, संस्कृति और विकास के क्षेत्र में अग्रणी बने।
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पिछले नौ वर्षों से शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के माध्यम से बेसिक, माध्यमिक और अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़े लगभग 60 लाख शिक्षक, शिक्षेतर कर्मचारी तथा उनके आश्रित परिवारजन स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस योजना का दायरा और अधिक विस्तारित करते हुए उच्च शिक्षा विभाग, राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के 7.30 लाख से अधिक शिक्षकों एवं उनके आश्रित परिवारों को भी इसके अंतर्गत शामिल किया है। इसके साथ ही जल्द ही ढाई लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी इस योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा शिक्षकों और शिक्षण क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा बीमा कवर भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य अधिक सुरक्षित हो सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि गुरु स्वयं ज्ञान का प्रकाश हैं। वे शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, विवेक, संस्कार और आत्मविश्वास के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास की भी आधारशिला होता है। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब समाज में गुरुजनों का सम्मान, शिक्षा का महत्व और संस्कारों की परंपरा निरंतर मजबूत होगी।
अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विद्यार्थियों, युवाओं और नागरिकों से विशेष आग्रह किया कि वे अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव सदैव बनाए रखें। उनके आदर्शों, शिक्षाओं और जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारें। यही सच्चे अर्थों में गुरु पूर्णिमा का संदेश है और यही एक सशक्त, शिक्षित, संस्कारित तथा विकसित समाज के निर्माण का सबसे प्रभावी मार्ग है।




