KGMU में 8 और 9 अगस्त को PH Summit 2026, पल्मोनरी हाइपरटेंशन पर मंथन करेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ

Neeraj Dwivedi, Updated, 7 August 2026

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से 8 और 9 अगस्त को PH Summit 2026 का आयोजन किया जाएगा। शताब्दी चिकित्सालय फेज-2 के ऑडिटोरियम में आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत, अमेरिका और आयरलैंड सहित कई देशों के विशेषज्ञ पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) के निदान, उपचार और नवीनतम शोध पर विचार साझा करेंगे। सम्मेलन की थीम “Advancing Diagnosis, Therapeutics and Outcomes” रखी गई है।

प्रेस वार्ता में विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने बताया कि पल्मोनरी हाइपरटेंशन एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ जाता है। इसकी वजह से हृदय को फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। सांस फूलना, थकान, सीने में दर्द, चक्कर आना और पैरों में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं। दुर्भाग्यवश, इन लक्षणों को सामान्य समझकर अनदेखा कर दिया जाता है, जिससे बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है।

डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है, जब वे गंभीर अवस्था (WHO Functional Class III या IV) में पहुंच चुके होते हैं। लक्षण शुरू होने और बीमारी की पहचान होने में औसतन 1.5 से 2 वर्ष लग जाते हैं। यदि समय पर उपचार न मिले तो मरीजों के जीवित रहने की संभावना तेजी से घट जाती है और उन्नत अवस्था में हार्ट या लंग ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प बचता है।

विशेषज्ञों के अनुसार पल्मोनरी हाइपरटेंशन का संबंध जन्मजात हृदय रोग, लेफ्ट हार्ट फेलियर, COPD, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज, किडनी रोग, रक्त के थक्के, ऑटोइम्यून बीमारियों और कुछ आनुवंशिक कारणों से भी हो सकता है। महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है। समय पर जांच के लिए इकोकार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन, लंग फंक्शन टेस्ट और राइट हार्ट कैथेटराइजेशन जैसी आधुनिक जांचें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

दो दिवसीय सम्मेलन में अमेरिका के डॉ. संदीप सहाय, आयरलैंड के डॉ. सैयद रेहान क्वादेरी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पल्मोनरी, कार्डियोलॉजी और रेस्पिरेटरी विशेषज्ञ भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक होंगे। सम्मेलन में नई रिसर्च, आधुनिक उपचार पद्धतियों और जटिल मामलों के प्रबंधन पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।

KGMU के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग का कहना है कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना, पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समय पर पहचान को बढ़ावा देना और मरीजों को बेहतर एवं साक्ष्य आधारित उपचार उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सांस फूलने जैसे शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेकर समय पर जांच कराई जाए तो इस जानलेवा बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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